[ad_1]

सोनिया मिश्रा/ चमोली. इन दिनों जहां उत्तराखंड के मैदानी इलाकों में ठंड खत्म हो चुकी है और गर्मियों का मौसम शुरू होने वाला है, वहीं पहाड़ों में अभी भी ठंड जारी है. उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में भोटिया जनजाति की महिलाओं द्वारा विशेष प्रकार की चाय का सेवन किया जाता है. जिसे ‘ज्या’ कहते हैं. इस चाय में सत्तू, गुड़, घी, आटा, नमक का प्रयोग किया जाता है. जिसे शादी, मुंडन जैसे शुभ कार्यों के साथ मेहमान के घर आने पर बनाया जाता है, भोटिया जनजाति के लोग इस चाय को सर्दी हो या गर्मी हर मौसम में पीना पसंद करते हैं.

चमोली की रहने वाली लवली राणा बताती हैं कि सर्दियों में पी जाने वाली नमकीन चाय सेहत के साथ स्वाद से भरपूर होती है. इसे बनाने का तरीका भी बहुत खास है. नमकीन चाय बनाने के लिए एक बर्तन में सबसे पहले पानी गर्म किया जाता है, जिसके बाद उसमें चायपत्ती (धुनेर) डालते हैं. चायपत्ती को उबाल आने तक पकाते हैं. और छानकर ‘दुंबू’ (गिलास नुमा लकड़ी का बर्तन) में स्वाद अनुसार दूध, नमक, चुटकी भर आटा, 1 से 2 चम्मच घी/ पीना घी (चूली के अंदर के बीज, दाती अखरोट का बीज, नारियल को पीसकर बनाते हैं) डालते हैं और दुंबू में उस चाय को फेंटते हैं, जिसके कुछ समय बाद उस चाय को कटोरी में डालकर परोसा जाता है और यह चाय सत्तू के साथ पी जाती है.

नमकीन चाय और सत्तू का नाश्ता
स्थानीय निवासी मंगसिरी देवी कहती हैं कि सर्दियों में वे सभी नमकीन चाय और सत्तू को नाश्ते में परोसते हैं, वह बताती हैं कि वैसे तो ज्या का सेवन हर मौसम में किया जाता है लेकिन सर्दियों के मौसम शुरू होते ही सभी इसे पीना पसंद करते हैं. यह सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद है क्योंकि इसमें घी, नमक, खास तरीके की चायपत्ती इस्तेमाल किया जाता है, जिनकी तासीर गर्म होती है.

गर्मियों में छोड़ देते हैं घर
मंगसिरी देवी कहती हैं कि वह गर्मियों ने जब 6 महीने नीति घाटी में रहती हैं, उस दौरान विभिन्न तरीके के व्यंजन बनाती हैं और सर्दियों में वह देवली बगड़, कालेश्वर में रहते हैं. वहीं स्थानीय दीक्षा राणा बताती हैं कि वह अपने सभी शुभ कार्यों में अपने पारंपरिक वेशभूषा के साथ स्थानीय पकवान बनाती हैं, जिससे उन्हें अपनी संस्कृति से रूबरू होने का मौका मिलता है.

Tags: Chamoli News, Food 18, Life18, Local18, Uttarakhand news

[ad_2]

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *