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संजय यादव/बाराबंकी: आज के आधुनिक युग में, जब विज्ञान ने चिकित्सा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाए हैं, आयुर्वेद की प्राचीन चिकित्सा पद्धति फिर से लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है. पीपल, एक ऐसा ही वृक्ष है, जिसका उल्लेख पुराणों में भी मिलता है और जिसके सभी भाग औषधीय गुणों से भरपूर हैं. पीपल की छाल, पत्ते और दूध, अनेक रोगों का निदान करने में सहायक होते हैं. पौराणिक काल में लोग आयुर्वेद के माध्यम से ही अपनी बीमारियों का इलाज करते थे पीपल उन महत्वपूर्ण औषधियों में से एक था.
आयुर्वेद के अनुसार, पीपल का पौधा हमारी सेहत के लिए अत्यंत लाभकारी है. यह मधुमेह, यकृत, हृदय, पेट की समस्याएं, दांतों का दर्द, रक्तचाप, अस्थमा जैसी कई गंभीर बीमारियों में उपयोगी है.

पीपल के सभी भाग गुणकारी
जिला अस्पताल बाराबंकी के चिकित्सक, डॉ. अमित वर्मा (एमडी मेडिसिन) बताते हैं कि पीपल के पेड़ में अनेक औषधीय गुण पाए जाते हैं. इसकी पत्तियों का रस, छाल और दूध हमारे शरीर में होने वाली कई बीमारियों से बचाता है.

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पत्तियों का रस: हृदय रोगियों में रक्तचाप को नियंत्रित करने में सहायक होता है. साथ ही, यह मधुमेह को भी नियंत्रित करने में मदद करता है. दांतों के दर्द में भी इसका रस लाभकारी होता है.
छाल: अस्थमा के रोगियों के लिए फेफड़ों की सूजन को कम करने में मददगार होती है. एड़ियों के फटने पर, छाल का लेप लगाने से लाभ होता है.
काढ़ा: पेट दर्द, यकृत की समस्याओं और पाचन क्रिया को बेहतर बनाने के लिए काढ़ा उपयोगी होता है.

यह स्पष्ट है कि पीपल एक अद्भुत वृक्ष है, जो अनेक रोगों का निदान करने में सहायक होता है. आयुर्वेद के अनुसार, इसका उपयोग प्राकृतिक और सुरक्षित तरीके से स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए किया जा सकता है.

अन्य महत्वपूर्ण बातें
पीपल के औषधीय गुणों का उपयोग करने से पहले, डॉक्टर से सलाह लेना आवश्यक है.
गर्भवती महिलाओं और बच्चों को पीपल की औषधियों का उपयोग करने से बचना चाहिए.
पीपल के पेड़ को पवित्र माना जाता है, इसलिए इसकी पूजा भी की जाती है.

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