आशीष कुमार/पश्चिम चंपारण. पश्चिम चंपारण जिले का थरुहट क्षेत्र तेजी से विकास कर रहा है. आदिवासी महिलाओं ने खुद के दम पर गांव में ही एक बेहतरीन मार्केटिंग सिस्टम डेवलप कर लिया है, जहां वे कई तरह की चीजों का निर्माण और उत्पादन कर गांव की अन्य महिलाओं को रोजगार मुहैया करा रही हैं. फिलहाल, जिले के बगहा-2 प्रखंड की थारू महिलाएं मछली का अचार बनाकर इस देश के कई राज्यों सहित पड़ोसी देश नेपाल तक सप्लाई कर रही हैं. गौर करने वाली बात यह है कि मछली का अचार बनाने का यह सिलसिला कोरोना काल में शुरू किया गया, जो कुछ समय के संघर्ष के बाद वरदान साबित हो रहा है. आज देश के विभिन्न राज्यों में थरुहट में बनाए गए मछली के अचार की भारी डिमांड है.

जिले के बगहा-2 प्रखंड के मझौआ गांव निवासी रामजी सिंह महतो मत्स्य पालक हैं. उन्होंने कोरोना से पूर्व उत्तराखंड के पंतनगर से मछली का अचार बनाने का 21 दिनों का प्रशिक्षण लिया था. इस बीच कोरोना आ गया. महामारी के दौरान जब पूरी दुनिया घर में सिमट गई, तब मछलियों की बिक्री भी काफी कम हो गई. ऐसे में रामजी ने मत्स्य पालन का फायदा उठाते हुए मछलियों का अचार बनाना शुरू कर दिया. इस काम में सहयोग करने वाली महिलाओं को उन्होंने प्रशिक्षण भी दिया. रामजी कहते हैं कि पूरे बिहार में गिने चुने व्यावसायी ही मछली का अचार बनवाते हैं.

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हर साल 7 क्विंटल अचार की खपत
रामजी बताते हैं कि उनकी पत्नी, बेटी समेत दर्जनों महिलाएं मिट्टी के चूल्हे पर विशेष तकनीक से अचार बनाती हैं, जो लंबे समय तक टिकाऊ होता है. यह किसी भी प्रकार के गंध से बचा रहता है. अच्छी बात यह है कि रामजी के पास खुद के 8 पोखरे हैं, जिनमें से 4 में मत्स्य पालन किया जाता है. सावन, नवरात्रि, पितृपक्ष जैसे मौकों पर मछलियों की बिक्री कम हो जाती है. ऐसे समय में वे मछलियों का अचार बनाने का सिलसिला शुरू करते हैं. उन्होंने बताया कि वे हर साल 6 से 7 क्विंटल अचार बनवा लेते हैं.

1200 से 1000 रुपए किलो बिकता है अचार
रामसिंह महतो का कहना है कि उनके यहां रोहू, कतला, चेपुआ, गरई और अन्य किस्म की मछलियों का अचार बनाया जाता है. इसमें रोहू और चेपुआ के अचार की कीमत क्रमशः 1200 और 1000 रुपए प्रति किलो है. जबकि कुछ मछलियों के अचार की कीमत 500 से 900 रुपए प्रति किलो तक है. मछलियों के इस अचार की बिक्री स्टॉल लगाकर भी की जाती है. इसके अलावा यूपी, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल से ऑर्डर भी मिलते हैं.

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4 thoughts on “Have you ever eaten Rohu, Katla, Chepua, Garai fish pickle… It is supplied from Tharuhat from Delhi, UP to Nepal. – News18 हिंदी”

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