Traffic Noise Linked High blood pressure: हम सब जानते हैं कि प्रदूषण हमारे लिए कितना नुकसानदेह है. लेकिन अधिकांश लोग वायु प्रदूषण या जल प्रदूषण के बारे में ही जानते हैं जबकि साउंड पॉल्यूशन या ध्वनि प्रदूषण भी हमारे लिए कम नुसानदेह नहीं है. ध्वनि प्रदूषण यानी ज्यादा शोर या आवाज से निकलने वाली कंपन के कारण जो प्रदूषण होता है उसे ध्वनि या साउंड पॉल्यूशन कहते हैं. ध्वनि प्रदूषण से सिर्फ कान ही खराब नहीं होते बल्कि इससे आपके शरीर के ब्लड प्रेशर का मीटर भी बढ़ जाएगा. यह बात हम नहीं, बल्कि एक रिसर्च में सामने आई है. रिसर्च के मुताबिक ट्रैफिक से निकलने वाली ध्वनियां ब्लड प्रेशर को बढ़ा देती है. अध्ययन के मुताबिक सड़क पर बीपिंग साउंड, इमरजेंसी सायरन और गाड़ियों के इंजन से निकली आवाज का सीधा संबंध हाई ब्लड प्रेशर से हैं.

भीड़-भाड़ वाले ट्रैफिक के पास रहना जोखिमपूर्ण

ग्लोबल डाइबेट्स कम्यूनिटी के मुताबिक अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता प्रोफेसर जिंग ह्वांग ने बताया कि अधिक शोर से कान के पर्दे पर असर पड़ता है यह बात हम सब जानते हैं लेकिन ट्रैफिक से निकलने वाले शोर ब्लड प्रेशर को बढ़ा देता है, यह सुनने में थोड़ा अजीब लगता है. उन्होंने कहा कि बेशक लोग अपने घरों में साउंड पोल्यूशन को कंट्रोल कर लेते हैं लेकिन यदि आपका घर भीड़-भाड़ वाले ट्रैफिक के पास है तो इससे हाई ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ जाता है. इससे दिल से संबंधित कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है.

शांत इलाकों में रहने वालों में खतरा कम

इस अध्ययन में अधेड़ उम्र के 2.40 लाख लोगों के हेल्थ डाटा का विश्लेषण किया गया. इन डाटा का गहराई से अध्ययन किया गया. विश्लेषण के बाद पाया गया कि जो लोग बहुत व्यस्त सड़कों या ट्रैफिक के आसपास रहते हैं उन लोगों में शांत इलाकों में रहने वालों की तुलना में हाई ब्लड प्रेशर के मामले बहुत ज्यादा थे. अध्ययन में पाया गया कि जो लोग ज्यादा ट्रैफिक वाले इलाके में रहते थे और वायु प्रदूषण के संपर्क में भी ज्यादा थे उन लोगों हाइपरटेंशन का खतरा कहीं ज्यादा था. प्रोफेसर जिंग ह्वांग ने बताया कि अधिकांश लोग इन दोनों तरह के खतरों के एक्सपोजर में रहते हैं, खासकर शहरी लोगों में. ऐसे में इन खतरों को पहचानना हमारे विए बेहद जरूरी है. अध्ययन में यह भी पाया गया कि जो लोग शांत इलाकों में रहते हैं, उन लोगों में शोर वाले इलाके में रहने वाले लोगों की तुलना में ब्लड प्रेशर बढ़ने का जोखिम कम था. प्रोफेसर जिंग ह्वांग ने कहा कि इतने बड़े सैंपल के साथ यह अध्ययन संभवतः पहला प्रयास है. लेकिन जरूरी इस बात की है कि इन खतरों को पहचान कर इससे बचना जरूरी है.

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