विपुल अग्रवाल/ श्रीगंगानगर. काजू कतली का नाम सुनती ही हमारे मुंह में पानी आ जाता है. आप ने आज तक बहुत सारी जगह की काजू कतली के बारे में सुना होगा और खाई होगी. लेकिन आज हम आपको ऐसी जगह की काजू कतली के बारे में बताने जा रहे है, जिसके स्वाद का दीवाना हर कोई है. श्रीगंगानगर जिले के अनूपगढ़ शहर में प्रसिद्ध महाराज मिष्ठान भंडार की काजू कतली का अलग ही स्वाद है.

महाराजा मिष्ठान भंडार की काजू कतली की बात करें तो इसका स्वाद ओरों से अलग है. इसको बनाने के लिए दुकानदार शुद्ध दूध के मावे का उपयोग तो किया ही जाता है इसके अतिरिक्त मीठे की मात्रा कम रखकर गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाता है. महाराजा मिष्ठान भंडार के मालिक छगन बजाज बताया कि उनकी चार पीढ़िया इस मिष्ठान भंडार को चलती आई है. आज भी इसका क्रेज पहली की तरह बना हुआ है.

जानिए बनाने की विधि
काजू कतली को बनाने के लिए सबसे पहले आवश्यकता अनुसार काजू को 2 घंटे तक पानी में भिगोकर रखा जाता है. जिसके पश्चात काजू को अच्छे से साफ किया जाता है तथा धोकर काजू की अच्छे से पिसाई की जाती है. इसके बाद इसमें कम मात्रा में चीनी को मिलाया जाता है तथा इसकी सिकाई की जाती है. सिकाई करने के बाद इसे मावे के साथ मशीन में डाला जाता है तथा इसकी घुटाई की जाती है. घुटाई के बाद तैयार हुए मिक्सचर को एक बड़े फट्टे पर बेला जाता है. इसके पश्चात उसे कुछ देर सूखने के लिए रख दिया जाता है, सूखने के बाद उस पर सिल्वर की पर्त लगाई जाती है तथा उसे त्रिकोणीय आकार में काटकर काजू कतली का रूप दिया जाता है.

15 दिनों तक नहीं होती है खराब
उन्होंने बताया कि सर्दी में यह काजू कतली 15 दिन तो वही गर्मी में सप्ताह से 10 दिन तक खराब नहीं होती है. इस काजू कतली के विशेष स्वाद के कारण ही इसकी मांग उत्तर प्रदेश जैसे राज्य और जयपुर, जोधपुर, बीकानेर जैसे जिलों में भी इसकी खूब रहती है. उन्होंने बताया कि शादी के सीजन के समय प्रतिदिन 80 किलो से 1 क्विंटल काजू कतली के ऑर्डर रहते हैं. जिस कारण लोगों को एडवांस में यहां बुकिंग करवानी पड़ती है. वर्तमान समय में काजू कतली का भाव 650 रुपए प्रति किलो के हिसाब से हैं.

Tags: Food, Food 18, Street Food



Source link

75 thoughts on “You might not have eaten such delicious Kaju Katli. There is a demand for Kaju Katli in other states. – News18 हिंदी”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *