रिपोर्ट- मनीष पुरी
भरतपुर. सरसों के खेत और उनके बीच रोमांस करते हीरो हीरोइन बॉलीवुड फिल्मों के लोकप्रिय सीन हैं. फिल्म का पूरा परिदृश्य पंजाब का रहता है. सरसों का साग और मक्के दी रोटी भी पंजाब की पहचान है. इसलिए लगता है पंजाब ही सरसों का प्रदेश है. जबकि सबसे ज्यादा सरसों राजस्थान में होता है. पूरे देश का आधा सरसों राजस्थान ही दे रहा है.

उत्तर भारत और पूर्वोत्तर भारत में सबसे ज्यादा उपयोग किया जाने वाला खाद्य तेल सरसों है. राजस्थान में इसकी भरपूर खेती होती है. पूरे प्रदेश में भरतपुर सबसे बड़ा उत्पादक क्षेत्र है.

राजस्थान सरसों पैदावार में सबसे आगे
पूरे भारत के सरसों उत्पादन का आधा भाग राजस्थान से आता है. और इसमें भी भारत के उत्पादन की 48 प्रतिशत सरसों की पैदावार अकेले भरतपुर में होती है. इसका सबसे प्रमुख कारण यहां की भूमि का पीएच मान है जो हल्की क्षारीय प्रकृति की होने के कारण सरसों के लिए सबसे अच्छी मानी जाती है. यही वजह है कि यहां सरसों के तेल निकालने के लिए आधुनिक मिलें हैं. इनकी खासियत ये है कि तेल निकालते वक्त उसमें से सरसों के पोषक तत्व नष्ट नहीं होते.

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सबसे आगे भरतपुर
कृषि विभाग सहायक निदेशक सुरेश गुप्ता ने जानकारी दी भरतपुर जिले में लगभग साढ़े तीन लाख हैक्टेयर में सरसों की बुवाई की जाती है. यहां किसानों की आजीविका का मुख्य आधार भी यही है. क्षेत्र के सरसों उत्पादन को देखते हुए भारत सरकार के संस्थान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने भरतपुर के पास सेवर में राष्ट्रीय सरसों अनुसंधान केन्द्र की 1993 में स्थापना की है.

मुनाफे की फसल
भरतपुर के इस अनुसंधान केन्द्र ने सरसों की नयी-नयी वैरायटी तैयार की हैं. अब किसानों से इनकी बुवाई करायी जा रही है. किसानों को खेती की नयी तकनीकी सिखायी जा रही है. सरसों का औसत उत्पादन 21 क्विंटल प्रति हैक्टेयर है. काफी मुनाफे की फसल होने के कारण पिछले साल किसानों को अन्य फसलों की तुलना में सरसों से ज्यादा फायदा हुआ.

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