मनीष कुमार/ कटिहार: एक समय था जब चाय बनाने के लिए स्टील या एल्युमीनियम के बर्त्तन का उपयोग किया जाता था. लेकिन धीरे-धीरे इसमें बदलाव आने लगा और अब लोग चाय को स्वादिष्ट बनाने के लिए मिट्टी के बर्त्तन का प्रयोग करने लगे है. खास बात यह है कि मिट्टी के बर्त्तन में बने चाय की सोंधी खुशबू लोगों को काफी पसंद आती है. जिससे मिट्टी के कड़ाही में चाय बनाने का चलन बढ़ गया है.

आप भी अगर मिट्टी की कड़ाही में बने चाय पीने का शौक रखते हैं तो कटिहार जिला मुख्यालय के अंबेडकर चौक आना होगा. यहां कई वर्षो से दार्जिलिंग की स्पेशल चायपत्ती से लोगों को चाय पिलाया जा रहा है. इस दुकान के मालिक गौतम यादव ने बताया कि यहां चाय की चुस्की के लिए सुबह से शाम तक लोग आते रहते हैं. वो रोजाना 500 कप चाय बेच लेते है.

भीड़भाड़ वाले इलाके में दुकान रहने का मिलता है फायदा
गौतम यादव ने बताया कि अंबेडकर चौक के पास हीं चाय का स्टॉल लगाते हैं. यहां से व्यवहार न्यायालय, समाहरणालय एवं बीएमपी जवान का बैरेक पास हीं है. इसलिए लोगों की चहल-पहल रहती है. यहां अधिकारी से लेकर कर्मी तक चाय पीने के लिए आते हैं. मिट्टी के कढ़ाई में लाजबाब चाय बनता है, इसलिए लोगों को पसंद भी आता है. गौतम ने बताया कि पूर्व में देखते थे कि पूर्वज मिट्टी के बर्त्तन में दूध और दही रखा करते थे. इसी को देखकर आईडिया आया और मिट्टी के कढ़ाई में चाय बनाना शुरू कर दिया और ग्राहकों को पसंद भी आ रहा है.

500 कप चाय का रोजाना होता है सेल
चाय की चुस्की लेने पहुंचे युवा एवं बीएमपी के जवानों ने बताया कि यहां रोजाना चाय की चुस्की लेने आते हैं. मिट्टी के बर्त्तन में बने चाय का स्वाद हीं अलग है. दुकानदार गौतम यादव ने बताया कि ग्रामीण इलाके के किसानों से शुद्ध दूध लेते हैं. रोजाना 400 से 500 कप चाय की बिक्री हो जाती है. वहीं ग्राहकों को 10 रूपए प्रति कप में चाय पिलाते हैं. उन्होंने बताया कि सहयोगी के माध्यम से दार्जलिंग से स्पेशल चाय की पत्ती मंगवाते हैं और उसी से मिट्टी की कढ़ाई में चाय बनाकर ग्राहकों को पिलाते हैं.

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