रिपोर्ट-शक्ति सिंह
कोटा. होली की हर जगह की अपनी परंपरा है. एजुकेशन सिटी कोटा में होली पर कई जगहों पर झांकियां बनाई जाती हैं. कई जगह 45 साल से झांकियां बनाई जा रही हैं. हर बार उनकी थीम अलग रहती है. यही वजह है कि इन्हें देखने हजारों लोग रोजाना उमड़ते हैं. ये झांकियां होली के दो दिन पहले खोल दी जाती हैं. एजुकेशन सिटी में कोचिंग स्टूडेंट्स की सुसाइड का दर्द भी इस बार इन झांकियों में देखा जा सकता है.

कोटा में होली के मौके पर लगने वाली झांकी देखने बच्चों से लेकर हर आयु वर्ग के लोगों में खासा उत्साह रहता है. हर साल अलग-अलग थीम पर यह झांकियां बनाई जाती हैं. इस बार कोटा में होली की झांकियों में राम मंदिर से लेकर चंद्रयान-3 विक्रम लैंडर और कोचिंग सुसाइड तक का जिक्र किया गया है. इसके अलावा अशोक वाटिका में सीता और हनुमान के संवाद को दिखाया गया है. एक झांकी में भगवान विष्णु के दशावतार भी हैं.

झांकी में चंद्रयान-3
आदर्श होली संस्था के संयोजक राकेश शर्मा राकू ने बताया चंद्रयान-3 की भी सुंदर झांकी यहां बनाई गई है. इसमें चंद्रमा की सफेद सतह दर्शाने के लिए चूने और सीमेंट का इस्तेमाल किया गया है. साथ ही विक्रम और लैंडर हूबहू वैसे ही यहां खड़े किए गए हैं. चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहली बार किसी देश का झंडा लहराया है. ऐसे में हमने भी इस गौरवान्वित पल को झांकी के जरिए दिखाने की कोशिश की है.

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अयोध्या राम मंदिर की झांकी
कोटा से कई लोग अयोध्या राम मंदिर के दर्शन के लिए नहीं जा पा रहे हैं. इसलिए यहां राम मंदिर भी बनाया गया है. राकेश शर्मा राकू ने कहा जिस तरह से भगवान राम की प्रतिमा अयोध्या में है, ठीक वैसी ही हूबहू प्रतिमा यहां बनाई गई है.इसके अलावा अशोक वाटिका में भगवान हनुमान और मां सीता के संवाद को भी दिखाया गया है.

झांकी में विद्यार्थियों की पीड़ा
नयापुरा की आदर्श होली संस्था की झांकी में इस बार कोचिंग स्टूडेंट्स के दर्द को बयां किया गया है. राकेश शर्मा राकू ने कोटा कोचिंग की झांकी के बारे में बताया. आत्महत्या करने वाले बच्चों की क्या कहानी होती है. इस झांकी के जरिए कोटा के लोगों को सचेत किया गया है. इसमें बताया गया है कि कैसे उनके परिजन हंसी खुशी उन्हें यहां भेजते हैं और उसके बाद बच्चा पढ़ाई में पिछड़ने और अन्य कारणों से तनाव में चला जाता है. फिर आत्महत्या के बाद उसका शव यहां से जाता है.

बंगाली कलाकार बनाते हैं झांकी
शारदा सरस्वती विकास समिति के संयोजक श्याम मीणा ने बताया बंगाली कलाकारों को एक माह पहले ही यहां बुलाया जाता है. इसके पहले कोर कमेटी बैठकर तय कर लेती है कि किस थीम पर झांकी बनाना है. हर साल अलग-अलग थीम पर होली की झांकी बनाई जाती हैं. हम साल 2000 से झांकी लगा रहे हैं. इस साल ये हमारा 24वां आयोजन है. सिविल लाइंस में होली की झांकी बनाई है, जहां भगवान विष्णु के दशावतार को दिखाया गया है. यह झांकी आम जनता के लिए खोल दी गई है. बड़ी संख्या में लोग इसे देखने पहुंच रहे हैं. झांकी बनाने में करीब एक से डेढ़ माह का वक्त लगता है.

हर बार नयी थीम, गो कास्ट से होलिका दहन
मीणा ने बताया इससे पहले हमने भगवान महादेव के 12 ज्योर्तिलिंग बनाए थे. इसके अलावा रिवर फ्रंट को झांकियों के जरिए दर्शाया गया था. साथ ही इस बार राम मंदिर को लेकर सभी लोग उत्साहित हैं. भगवान विष्णु के दशावतार भी यहां झांकी में हैं. इसमें मत्स्य, कूर्म, वराह, नरसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध और कल्कि अवतार शामिल हैं. भगवान का काल्पनिक स्वरूप भी बनाया गया है. उन्होंने बताया कि इस बार होलिका दहन के लिए गोकास्ट का उपयोग किया जाएगा.

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