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रिपोर्ट-रविन्द्र कुमार
झुंझुनूं. राजस्थान का शेखावाटी क्षेत्र अपनी हवेलियों और स्थापत्य कला के लिए पूरे देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपनी अलग पहचान रखता है. यहां की मान्यताएं, यहां की हवेलियां, यहां के मंदिर, मस्जिद कुएं, बावड़ी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र माने जाते हैं. इन्हीं प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों के साथ अपनी एक अलग पहचान रखती है झुंझुनू की मेड़तनी की बावड़ी. यह बावड़ी अपने निर्माण के लिए तो विशेष है ही साथ ही लोगों की एक और मान्यता है उसके बारे में बताते हैं.

अगर आप कभी राजस्थान के झुंझुनू जिले में घूमने का प्लान बना रहे हैं तो इस जगह को देखे बिना बिल्कुल भी न लौटें. यह एक ऐसी जगह है जिसका पानी राह चलते राहगीर बिना लोटे या गिलास के पी सकते थे. इस बावड़ी का निर्माण इस तरह से किया गया है कि राहगीर पानी तक पहुंच कर पानी पी सकते थे. साथ में यहां आराम करने के लिए भी जगह बनाई गई है. वहां पर बैठकर कुछ देर आराम कर सकते हैं. कहा जाता है इस बावड़ी का निर्माण शासक शार्दुल सिंह शेखावत की रानी मेड़तनी के लिए सन 1783 में करवाया था. इस बावड़ी का नाम मेड़तनी की बावड़ी पड़ा.

कुष्ठ रोग की मान्यता
झुंझुनू के रहने वाले किशन लाल इस बावड़ी का मान्यता के बारे में बताते हैं. वो कहते हैं बावड़ी में पानी तो संरक्षित होता ही है. उसके साथ इसके पानी से नहाने से कुष्ठ रोग पूरी तरह ठीक हो जाता है. वो आगे कहते है लगभग 40 साल पहले उन्हें कोढ़ यानि कुष्ठ रोग हो गया था. इस रोग से वो दुखी हो गए थे. तब उनके बड़े भाई ने उन्हें इस बावड़ी के पानी से नहलाया उसके बाद बिना किसी डॉक्टर के इलाज के ही उनका यह रोग ठीक हो गया. इससे पहले भी पुरानी मान्यता रही है कि जब भी यहां से लोग निकलते थे तो वह पानी पीने के साथ ही इसके पानी से नहाते थे. उनका कुष्ठ रोग बिना किसी दवाई या डॉक्टर के इलाज के ठीक हो जाता था.

(Disclaimer: चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, वास्तु, फेंगशुई आदि विषयों पर आलेख अथवा वीडियो समाचार सिर्फ पाठकों/दर्शकों की जानकारी के लिए है. इनसे संबंधित किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूरी है. हमारा उद्देश्य पाठकों/दर्शकों तक महज सूचना पहुंचाना है. इसके अलावा, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की होगी. Local 18 इन तथ्यों की पुष्टि नहीं करता है.)

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